डम डम डम डम डमरू बाजे
कांपे धरा ये सारी
धमक धमक थाप पे उनके
थिरके हर इक प्राणी
नृत्य अनूठा, हो रहा प्रारंभ
अंत के संग में नाचता आरंभ
नेत्र में ज्वाला भड़के मद्धम
सारे जगत की थमी है धड़कन
क्या तो हिमालय, और क्या समंदर
झूमे सृष्टि, मचे बवंडर
ब्रह्मा विष्णु देव और दानव
पशु पक्षी यक्ष और मानव
मोह माया संग त्याग भी झूमे
हिरणो के संग बाघ भी झूमे
कौरव के संग नाचे पांडव
जब जब महादेव करते है तांडव।
तांडव की लय में डूबे सारे
देखो थिरकते अम्बर में तारे
चांद भी करता शिव का वंदन
सूर्य भी करता है अभिनंदन
प्रलय गाती गीत सुहाने
ज्वालामुखी के खुल गए मुहाने
आग का दरिया बहता निश्चल
सारी धरा करती है हलचल
स्वर्ग भी डोले, नर्क भी झूमे
धुरी पे शंभू के सब कुछ घूमे
डमरू बजता जागती प्रलय
सबका सबमें हो रहा विलय।।
डम डम डम डम डमरू बाजे
कापे धरा ये सारी
धमक धमक थाप पे उनके
थिरके हर इक प्राणी
सब कुछ होने वाला है भस्म
सब कुछ लेगा ईक नया जन्म
विध्वंस की धारा बहे अनंतम
सृजन की तेज़ हो रही स्पंदन
मृत्यु के संग नाचता जीवन
आरम्भ के संग झूम रहा अंत
चारो युग… भय से कांपे
शिव का डमरू जब जब बाजे
शिव का डमरू जब जब बाजे
शिव का डमरू जब जब बाजे
Home » Shiva Tandav Bhajan
Shiva Tandav Bhajan
Archit Srivastava
Dr Archit Srivastava aka Archwordsmith is a practicing doctor, writer and poet. He has penned over 300+ poems and stories over 26 years from a tender age of 10 years.
Share This
Previous Article
राम का नाम जुबां पे
Next Article